रक्षाबंधन पर निबंध (भाई-बहन का पवित्र त्यौहार)

शीर्षक : रक्षाबंधन पर निबंध
त्यौहार : रक्षाबंधन
दूसरा नाम : राखी, सलूनो, श्रावणी
अनुयायी : हिन्दू और लगभग सभी नेपाली और भारतीय
प्रकार : धार्मिक, सामाजिक भारतीय, नेपाली
लक्ष्य : भ्रातृभावना और सहयोग
तिथि : श्रावण पूर्णिमा
अन्य पर्व : भैया दूज

रक्षाबन्धन हिन्दुओ का प्रमुख त्यौहार व पर्व है जोकि हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं.

रक्षाबन्धन को श्रावण (सावन) के दिन मनाया जाता है इसलिए इसको श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं.

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रक्षाबंधन पर निबंध

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रक्षाबंधन के दिन राखी या फिर रक्षासूत्र का बहुत बड़ा महत्व है. इस दिन बहनें अपनी भाई को भिन्न-भिन्न प्रकार की राखी पहनाती है जैसे:-

रंगीन कलावें, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी महँगी वस्तु कुछ भी हो सकती है.

वैसे तो राखी बहनें अपने भाई को बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं के अनुसार और परिवार में जो छोटी लडकियाँ होती है वो अपने पिता को भी राखी बांद सकती है.

कभी-कभी सार्वजनिक रुप से किसी नेता अथवा प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बांधी जा सकती है.

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हिन्दुस्तान में जितने भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरुष सदस्य है वे अब परस्पर भाईचारे के लिए एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बाँधते हैं.

क्याँ आपको पता है? रक्षाबंधन का महत्व ?

हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षासूत्र बाँधते समय कर्मकाण्डी पण्डित या आचार्य संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण किया जाता हैं.

इस उच्चारण में ये बताया गया है कि रक्षाबन्धन का सम्बन्ध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है.

भविष्यपुराण के अनुसार इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए निम्नलिखित स्वस्तिवाचन किया (यह श्लोक रक्षाबन्धन का अभीष्ट मन्त्र है.

येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल: |
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ||

इस श्लोक का हिंदी अनुवाद है – “जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो.”

रक्षाबंधन पूजा विधि

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सभी महिलाएँ और पुरुष प्रात: स्नान के लिए चले जाते है और नये-नये वस्त्र पहनकर अपनी बहन का इंतजार करते है.

लडकियाँ एवम् महिलाएँ अपने भाई के लिए पूजा की थाली सजाती हैं. थाली में राखी के साथ-साथ रोली या हल्दी, चावल, दीपक, मिठाई और कुछ पैसे भी होते हैं.

लड़के और पुरुष अपनी बहन के इंतजार करते है और तैयार होकर टीका करवाने के लिये पूजा अथवा किसी उपयुक्त स्थान पर बैठते हैं.

सबसे पहले राखी के दिन अभीष्ट देवता की पूजा की जाती है, इसके बाद रोली या फिर हल्दी से भाई को टीका लगाया जाता है, टीके के ऊपर चावल लगाने की भी परम्परा है.

सिर्फ इतना ही नही चावल लगाने के बाद उसको सिर पर छिड़का जाता है, भाई की आरती उतारी जाती है और दाहिनी कलाई पर राखी बाँधी जाती है.

भारत में कुछ ऐसी भी प्रथा है जिसमे भाई के कान के ऊपर भोजली या भुजरियाँ लगाने की प्रथा भी है.

राखी बाँधने के बाद भाई अपनी बहन को उपहार या धन देते है और उनके पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेते हैं.

रक्षाबंधन की परम्परा को पूरा करने के बाद भोजन किया जाता है.

जिस तरह सभी पर्व में उपहार और खाने-पीने के विशेष पकवानों का प्रबन्ध होता है उसी प्रकार रक्षाबंधन का त्यौहार में भी पकवानों का विशेष महत्त्व है.

पुरोहित तथा आचार्य इस दिन सुबह उठकर यजमानों के घर पहुँच जाते है और उन्हें राखी बाँधते हैं, बदलें में उनसे धन, भोजन और वस्त्रइत्यादि प्राप्त करते हैं.

राखी का त्यौहार भारतीय समाज में सभी के अन्दर बहुत ही गहराई से समाया हुआ है. सभी के लिए ये बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है सभी इस पर्व को बहुत ही उल्लास के साथ मानते है.

बाहरी कड़ियाँ

अगर आपको रक्षाबंधन पर निबंध के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करनी है तो आप यहाँ पर क्लिक करके इसके बारें में पढ़ सकते हो.

आज मैंने आपको रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है इसके बारे में थोड़ी बहुत जानकारी शेयर करी है और मुझे पूरी उम्मीद है की ये जानकारी आपके लिए उपयोगी रही होगी.

अगर आप रक्षाबंधन के पर्व के बारे में हमारे सभी दर्शको के साथ अपने विचार शेयर करना चाहते हो तो कमेंट के माध्यम से आप अपनी बात हमारे सामने प्रस्तुत कर सकते हो और हाँ भाई बहन के इस आर्टिकल को जितना हो सके फेसबुक, ट्विटर, गूगल+ और व्हाट्सएप्प पर शेयर जरुर करें. 🙂 हैप्पी राखी दिवस

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