नवरात्रि के नौ दिन ऐसे करें माँ भगवती को खुश

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हम सब जानते है माँ भगवती शक्ति का स्त्रोत है वर्ष में दो बार नवरात्रे आते है तथा नवरात्रि के उपलक्ष्य में हम माँ की सच्चे दिल से उपासना करके उन्हें खुश करके खुद पर उनकी कृपा पा सकते है.

नवरात्र में माँ के 9 दिन के व्रत होते है तथा व्रत रखने के कुछ नियम होते है और पूजा की भी विधि होती है.

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विधिवत व्रत और पूजा करने से माँ जल्दी प्रसन्न होती है.

हम आपको नवरात्रि पूजन विधि के नौ दिन की विधिवत पूजा और नौ दिन के भोग के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे.

यदि आप इस तरिके से ही माँ की उपासना करेंगे तो माँ आपसे अवश्य प्रसन्न होगी.

लेकिन क्या आप जानते है की नवरात्री क्यों मनाई जाती है और वर्ष में दो बार क्यों मनाई जाती है आज पहले हम आपको नवरात्री कथा सुनते है

नवरात्री के टोटके और चमत्कारी उपाय जो बनायेंगे आपको मालामाल

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नवरात्रि की कथा

नवरात्री साल में अलग अलग समय में दो बार मनाया जाने वाला एकलौता त्यौहार है| पहले नवरात्रे गर्मी में चैत्र के माह में आते है और दूसरे नवरात्रे सर्दी में आश्विन माह में आते है.

प्रथम कथा के अनुसार

लंका के युद्ध के समय ब्रम्हा जी ने श्री राम जी से चंडी देवी का पूजन करके उन्हें प्रसन्न करने को कहा और विधि के अनुसार चंडी पूजन के लिए 108 नीलकमल भी लाने को कहा.

ये सब देखकर रावण ने भी अमरत्व पाने के लिये चंडी देवी का पूजन शुरू कर दिया और रावण के भी पूजा करने की बात को इंद्र देव ने पवन के माध्यम से श्री राम जी तक पहुचा दी.

इधर रावण ने श्री राम जी की पूजा भंग करने के लिए एक कमल चुरा लिया ताकि उनकी पूजा में विघ्न आ जाये.

श्री राम जी को उनका संकल्प टूटता हुआ सा लगा और सभी इस बात से भयभीत होने लगे की कही अब भगवती चंडी रुष्ट ना हो जाये.

तभी श्री राम जी को याद आया की उनको कमल नयन भी कहा जाता है तो उन्होंने अपना एक नेत्र पूजा में समर्पित करने का प्रण लिया.

जैसे ही श्री राम जी अपना नेत्र निकालने लगे तभी माँ भगवती प्रकट हो गयी और  माँ भगवती उनकी इस महानता से इतनी प्रसन्न हुई उन्होंने तभी श्री राम जी को विजयीभव: का आशीर्वाद दिया.

दूसरी और रावण की पूजा में हनुमान जी बालक के रूप में वहा जाकर बैठ गए और मंत्रो के उच्चारण के समय गलत मन्त्र का उच्चारण किया जिससे रावण से माँ भगवती रुष्ट हो गयी और रावण को शार्प दे दिया.

श्री राम जी के भगवती को खुश करने के बाद से ही नौ दिन का नवरात्र पूजन अर्थार्त दुर्गा पूजन किया जाता है.

द्रितीय कथा के अनुसार

माँ भगवती महिषासुर राक्षस का वध किया था क्योंकि महिषासुर ने कठोर तपस्या करके देवताओ से अजय होने का वरदानं ले लिया था और फिर देवताओ के अधिकार छीन कर उन्हें बंदी बनाना चाहता था.

तब माँ भगवती ने अस्त्र सस्त्र देवताओ को देकर उन्हें युद्ध में लड़ने का आदेश दिया.

यह युद्ध नौ दिन तक चला था तब माँ दुर्गा ने नवमे दिन महिषासुर का विनाश किया था तो इसलिए दुर्गा अष्टमी और दुर्गा नवमी मनाई जाती है और छोटी कन्याओ को भोग लगाकर माँ की कृपा ली जाती है.

नवरात्रि के नौ देवियो की उपासना

नवरात्री में नौ देवियो की पूजा के लिए नवदुर्गा रूपी तस्वीर या मूर्ति पूजा घर में स्थापित करे और तस्वीर के नीचे लाल कपड़े को बिछाये और थोड़े चावल मूर्ति के आस पास डालें.

आप अपने घर या ऑफिस में एक कलश भी स्थापित करे उस कलश में गंगा जल डालकर उसमें आम के या अशोक के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल स्थापित करे.

नारियल पानी वाला होना चाईये और कनेर के व् कमल के फूल अर्पित करने चाइये| दीपक हो से तो अखंड हो अर्थात जो नो दिन तक लगातार जगता रहे या फिर आप रोज सुबह सैम व दीपक जला सकते है.

दीपक के नीचे पान का पत्ता भी रक्खे और इसे नो दिन तक रखा रहने दे. अब आगे जानिए नौ दिन किन मंत्रो का जाप करना है.

नवरात्रि के चमत्कारिक दिव्य मंत्र

प्रथम नवरात्र माँ शैलपुत्री का होता है| माँ शैलपुत्री को लाल पुष्प अति प्रिय है लाल पुष्प चढ़ाकर मन्त्र का ध्यान करे माँ शैलपुत्री की उपासना के लिए!

#1.

माँ शैलपुत्री मंत्र
ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:।

इस मन्त्र का 108 बार जाप करे तथा मन्त्र पूर्ण होने के बाद माँ के सामने अपनी इच्छा बताये और उनकी कृपा मांगे.

#2.

दूसरी देवी का नाम ब्रह्मचारिणी है| ब्रह्मचारिणी देवी तप और संयम की देवी है इनका जप करने से व्यक्ति संयम शील होता है इनका मन्त्र भी 108 बार करना चाइए.

माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र
” देवी सर्वभू‍तेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता|
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।”

दूसरे नवरात्र को इस मन्त्र का जप करना चाइए.

#three.

तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध है इनके माथे पर अर्ध चंद्र होने के कारण चंद्रघंटा देवी कहते है| चंद्रघंटा देवी की|

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मां चंद्रघंटा के मंत्र
पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

इस मन्त्र का जाप करना चाइए और देवी से शांत मन रहने की इच्छा करनी चाइए क्योंकि इनको स्वर की देवी भी कहते है.

#four.

चौथी मूर्ति को कुष्मांडा देवी कहते है और मंद हसीं से ब्रम्हांण्ड का निर्माण करने के कारण इनको कुष्मांडा देवी कहते है कुष्मांडा देवी सूर्यलोक में निवास करती है इन्हें अष्टभुजा धरी भी कहते है.

कुष्मांडा देवी मंत्र
सुरासम्पूर्ण रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

इनका इस मन्त्र से जप करना चाइये.

#5.

पांचवी देवी का नाम स्कंदमाता मातागवन कार्तिक को भी स्कन्द भगवान् के नाम से जाना जाता है जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है तो देवी स्कंदमाता दुष्टो का नाश करती है.

माँ स्कंदमाता नवरात्रि मंत्र
देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

इनका इस मन्त्र से जप करना चाइये.

#6.

देवी के छठे रूप को कात्यायनी देवी कहते है इनका शरीर चमकीला होता है और इन्हे कमल पुष्प प्रिय है.

कात्यायनी देवी मंत्र इन हिंदी
चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना |
कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानव घातिनि ||

इनका इस मन्त्र से जप करना चाइये और कमल पुष्प जरूर अर्पण करना चाइये.

#7.

सातवा नवरात्र कालरात्रि माँ का होता है इन्हे देवी दुर्गा ने रक्तबीज का वध करने के लिए उत्पन्न किया था इन्हे शुभकारी भी कहा जाता है.

माँ कालरात्रि मंत्र
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
एक वेधी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।

इनका इस मन्त्र से जप किया जाता है इनकी उपासना अधिकतर तांत्रिक करते है.

#eight.

आठवाँ रूप महागौरी है ये शिवजी की अर्धांगिनी है इनका शरीर बहुत गोरा है इसलिए ये माँ गोरी कहलाती है इनके वस्त्र तथा आभूषण भी श्वेत है इसलिए इन्हे श्वेतांबरधारा भी कहते है.

माँ महागौरी मंत्र
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

इनका मन्त्र से जप करना चाइये और अपनी इच्छा हेतु इन्हे प्रसन्न करना चाइये.

#9.

सर्वसिद्धियो की दाती नवमी दुर्गा सिद्धिदात्री है| देवी पुराण में इनकी शक्तियों का महाबखान है इनकी आराधना से लौकिक व् परलौकिक शक्तिया भी प्राप्त होती है.

माँ सिद्धिदात्री मंत्र
है-सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

इनका इस मन्त्र से जप करना चाइये.

नवरात्रि के नौ देवियों के नौ दिन के भोग

शैलपुत्री देवी को सफेद आहार पसंद है अर्थार्त इन्हे सफ़ेद मिठाई और घी या फिर सामक के चावल का भोग लगाना चाहिए.

ब्रह्मचारिणी देवी को मीठा बहुत पसंद है आप उन्हें किसी भी शुद्ध मीठे भोजन का भोग लगा सकते है इन्हे मीठे पंचामृत का भोग भी बहुत पसंद है.

देवी चंद्रघंटा को दूध से बने भोग अतिप्रिय है आप इन्हे दूध, दही, खीर, माखन, रसगुल्ला मेवे आदि का भोग लगाकर प्रसन्न कर सकते है.

माँ कुष्मांडा देवी को मालपुए बहुत पसंद है यदि आप इन्हे मालपुए का भोग लगाते है तो इसमें कोई शक नहीं है की वे आपसे प्रसन्न न हो माँ जरूर प्रसन्न होगी.

स्कंदमाता को केले फल बहुत पसंद है इन्हे केले का भोग लगाकर उसे किसी ब्राम्हण को देना चाइये चाहे तो दूसरे फल भी चढ़ा सकते है परन्तु केले का भोग माता का प्रिय है.

कात्यायनी माँ को शहद बहुत पसंद है आप इन्हे शहद का भोग लगाकर इनकी कृपा प्राप्त करे और फिर खुद भी शहद का सेवन करे.

कालरात्रि माँ को गुड़ का भोग लगाए या गुड़ से बने किसी भी मिष्ठान का भोग लगाए और बाद में गुड़ ब्राम्हण को दान देदे.

माँ महागौरी को नारियल का भोग लगाए और फिर नारियल के प्रसाद को कन्याओ को भी दे और खुद भी ग्रहण करे.

माँ सिद्धिदात्री हल्वापुरी का ही भोग लेती है इन्हे हलवा अत्यधिक प्रिय है.

नवमे दिन नो जगह हल्वापुरी रखकर  भोग लगाना चाइये और उस भोग को परिवार के साथ ग्रहण करना चाइये.

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प्रिय भक्ति आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें! यह नवरात्री त्यौहार आपके लिए शुभ हो यही हम दुआ करते है. 🙂

प्रिय भक्ति माता का यह लेख अब यह पर खत्म होता है| मुझे उम्मीद है की आपको यह जानकारी पसंद आई होगी.

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